Punaralochana പുനരാലോചന
- Kottayam National Book Stall 1986
- 181
Generalसाहित्य और मूल्य- विकास की स्थिति, सामाजिक मूल्य, स्वांतर्यपूर्व कहनियों में मूल्य, पुरानी पीढी के कहानिकारों का परिवर्तिता दृष्टिकोण, यशापाल, शाहल सांकृत्यायन, रांगेय राघव, लज्ञेय, समाजिक चेत्